Hing (Asafoetida)

कल की ही बात है पाचन तंत्र ठीक नही था। तो श्रीमती जी ने कहा कि हींग का घोल लगा लो नाभि पर। अक्सर ऐसा ही करता हूँ । आराम मिल जाता है।परन्तु कल कोई आराम नही आया। प्रक्रिया को दोहराया गया। पर कोई असर नहीं। मुझे हींग पर संदेह हुआ की हींग में मिलावट है। फिर हींग का परीक्षण शुरू हुआ और वो हींग मिलावटी थी। तब हमने सेक्टर 17 चंडीगढ़ की एक एक्सहिबिशन से ली हुई हींग का प्रयोग किया तब जा कर आराम आया।  मिलावट और महंगाई आज हमें इन दोनों का ही सामना करना पड़ रहा है। अब तो हमारी स्वादिष्ट हींग में राल और रंग मिलाये जा रहे हैं। अब अगर आप के घर में मिलावटी हींग आ जाए तो आप कैसे पता कर सकते है ये जानकारी आप के समक्ष रखूंगा।
हींग दो प्रकार की होती हैं- 
एक हींग काबूली सुफाइद (दुधिया सफेद हींग) और दूसरी हींग लाल। 
हींग में सल्फर की मौजूदगी के कारण ही इसकी तीक्ष्ण गन्ध होती  है। 
 
यह तीन रूपों में उपलब्ध हैं– ‘टियर्स ‘ , ‘मास ‘ और ‘पेस्ट’।
‘टियर्स ‘, वृत्ताकार व पतले, राल का शुध्द रूप होता है इसका व्यास पाँच से 30 मि.मी. और रंग भूरे और फीका पीला होता है।
 ‘मास’ – हींग साधारण वाणिज्यिक रूप है जो ठोस आकारवाला है।
 ‘पेस्ट ‘ में अधिक तत्व मौजूद रहते हैं।
 सफेद व पीला हींग जल विलेय है जबकि गहरे व काले रंग की हींग तैल विलेय है।
 
अपने तीक्ष्ण सुगन्ध के कारण शुद्ध हींग को पसंद नहीं किया जाता बल्कि इसे स्टार्च ओर गम (गोंद) मिलाकर संयोजित हींग के रूप में, ईंट की आकृति में बेचा जाता है।
 
वैज्ञानिक परीक्षण
1. हींग का छोटा सैंपल एक कांच के ग्लास में डाल कर उसमें तीन चार मिली लीटर पानी डालें यदि पानी का रंग दुधिया हो जाये तो आप के हींग शुद्ध है यदि कोई अन्य रंग हो तो आपकी हींग मिलावटी है।
2. हींग के टुकड़े को  आग के सामने ले जायें हींग बढ़िया ज्वाला छोड़ता हुआ खत्म हो जाएगा। अगर कुछ बच गया तो वो मिलावट है।
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सुनील अरोरा
पीजीटी रसायन विज्ञान
र उ व समलहरी
पंचकूला
हरियाणा।

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